Monday, 28 August 2017

बाल वैज्ञानिकों के लिए वरदान है इंस्पायर्ड अवार्ड योजना


इन्‍नोवेशन इन सायंस परस्‍यूइट फॉर इन्‍सपायर्ड रि‍सर्च (इन्‍सपायर) वि‍ज्ञान और प्रौद्योगि‍की मंत्रालय द्वारा कार्यान्‍वि‍त एक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम है जो छात्रों के बीच मौजूद प्रति‍भा को वि‍ज्ञान के अध्‍ययन के लि‍ए और अनुसंधान कार्य में कैरि‍यर नि‍र्माण के लि‍ए आकर्षि‍त करता है।
इस कार्यक्रम के तीन घटक हैं -
  •   वि‍ज्ञान की ओर प्रति‍भाओं की शुरूआती आकर्षण योजना (एसईएटीएस), के दो उप-घटक हैं- 10000 रुपये का इन्‍सपायर पुरस्‍कार और कि‍सी वि‍ज्ञान शि‍वि‍र में वैश्‍वि‍क वि‍ज्ञान अग्रणि‍यों के माध्‍यम से मेंटरशि‍प।
  •   बी.एससी और एम.एससी स्‍तरों पर नि‍रंतर शि‍क्षा के लि‍ए 80,000 रुपये की दर से उच्‍चतर शि‍क्षा छात्रवृत्‍ति‍(एसएचई)।
  • युवा अनुसंधानकर्ताओं के लि‍ए अनुसंधान कैरि‍यर हेतु आश्‍वस्‍त अवसर (एओआरसी) के भी दो उप-घटक हैं- इन्‍सपायर फेलोशि‍प और इन्‍सपायर संकाय।
            योजना के पहले घटक- इन्‍सपायर पुरस्‍कार का कार्यान्‍वयन राज्‍यों/केन्‍द्रशासि‍त प्रदेशों के माध्‍यम से केन्‍द्रीय स्‍तर पर कि‍या जा रहा है। योजना के अन्‍य घटक का क्रि‍यान्‍वयन संबंधि‍त शैक्षि‍क/अनुसंधान संस्‍थानों और वि‍श्‍ववि‍द्यालयों आदि‍के माध्‍यम से वि‍ज्ञान और प्रौद्योगि‍की वि‍भाग द्वारा केन्‍द्रीय स्‍तर पर कि‍या जा रहा है।   इन्‍सपायर पुरस्‍कार योजना का उद्देश्‍य 10-15 वर्ष के उम्र समूह छात्रों को वि‍ज्ञान के क्षेत्र में आकर्षि‍त करने और कैरि‍यर बनाने तथा अभि‍नवता का अनुभव करने के लि‍ए उन्‍हें सुवि‍धा प्रदान करना है।
जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, श्री एस पी सेमवाल, बाल वैज्ञानिकों को प्रेरित करते हुए.
मुख्‍य वि‍शेषताएं :
       योजना के अधीन 11वीं पंचवर्षीय योजना की मंजूरी के अनुसार पंचवर्षीय योजना अवधि‍ के दौरान 5000 हजार रुपये के इन्‍सपायर पुरस्‍कार के लि‍ए देश के प्रत्‍येक वि‍द्यालय से दो छात्रों (छठी से लेकर 10वीं कक्षा तक) का चयन कि‍या जाता है, ताकि‍ वे वि‍ज्ञान के प्रोजेक्‍ट/मॉडल तैयार कर सकें। इन्‍सपायर पुरस्‍कार के लि‍ए वारंट सीधे तौर पर चयनि‍त छात्र के नाम से जारी कि‍या जाता है और राज्‍य/स्‍कूल के अधि‍कारि‍यों के माध्‍यम से उनके पास भेजा जाता है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी टिहरी गढ़वाल का कार्यक्रम में बैच अलंकरण करते हुए.
           योजना के अधीन सभी पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं के लि‍ए जि‍ला स्‍तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्‍ट प्रति‍योगि‍ता (डीएलईपीसी) में भाग लेना जरूरी होता है। जि‍ले से आई 5 से 10 प्रति‍शत सर्वश्रेष्‍ठ प्रवि‍ष्‍टि‍यों का चयन राज्‍य स्‍तरीय प्रदर्शनि‍यों और प्रोजेक्‍ट प्रति‍योगि‍ता (एसएलईपीसी) में भाग लेने के लि‍ए कि‍या जाता है। राज्‍य/केन्‍द्रशासि‍त प्रदेश से आई सर्वश्रेष्‍ठ 5 प्रति‍शत प्रवि‍ष्‍टि‍यों (कम से कम पांच) का चयन राष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रदर्शनी और प्रोजेक्‍ट प्रति‍योगि‍ता (एनएलईपीसी) में भागीदारी के लि‍ए कि‍या जाता है। सभी स्‍तरों पर परि‍योजनाओं का मूल्‍यांकन वि‍शेषज्ञों की एक नि‍र्णायक समि‍ति‍द्वारा कि‍या जाता है। डीएलईपीसी, एसएलईपीसी और एनएलईपीसी के चयनि‍त पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं के साथ ही प्रोजेक्‍ट की तैयारी के लि‍ए मार्गदर्शन देने वाले मेंटर/शि‍क्षक के लि‍ए भागीदारी/मेधावि‍ता प्रमाणपत्र जारी कि‍ए जाते हैं। जि‍ला, राज्‍य और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रदर्शनि‍यां आयोजि‍त करने पर आने वाली पूरी लागत का वहन वि‍ज्ञान और प्रौद्योगि‍की वि‍भाग द्वारा कि‍या जाता है।  इन्‍सपायर पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं के लि‍ए छात्रों का चयन प्रत्‍येक स्‍कूल के प्रधानाध्‍यापक/प्रधानाध्‍यापि‍का/प्रधानाचार्य द्वारा कि‍या जाता है, जि‍नके लि‍ए वि‍ज्ञान में रुचि‍रखने वाले सर्वश्रेष्‍ठ छात्र का नामांकन भेजना और इसके साथ ही नामांकन और चयन के लि‍ए स्‍कूल द्वारा नि‍र्धारि‍त शर्तों का भी वि‍वरण भेजना जरूरी है। जि‍ला स्‍तर पर शि‍क्षा अधि‍कारी वि‍हि‍त प्रारूप्‍में अपने क्षेत्राधि‍कार के वि‍द्यालयों का वि‍वरण तैयार करते हैं और राज्‍य स्‍तर पर शि‍क्षा अधि‍कारि‍यों के माध्‍यम से प्रस्‍ताव डीएसटी के पास भेजते है
मुख्य शिक्षा अधिकारी, टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड - श्री डी.सी. गौड़
      छठी कक्षा से लेकर 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई करने वाले देश के सभी स्‍कूल चाहे वह सरकारी अथवा नि‍जी हों, अनुदानप्राप्‍त हो अथवा बि‍ना अनुदान हों, चाहे वे केन्‍द्र सरकार अथवा राज्‍य सरकार अथवा स्‍थानीय नि‍कायों द्वारा संचालि‍त हों, इस योजना में भागीदारी के लि‍ए पात्र हैं।
      राज्‍य के अधि‍कारि‍यों से इस प्रकार प्राप्‍त कि‍ए गए प्रस्‍तावों के लि‍ए योजना के मानकों के अनुसार डीएसटी में प्रक्रि‍या संचालि‍त की जाती है और चयनि‍त छात्रों के नाम से पुरस्‍कार वारंटों को तैयार करने के लि‍ए डीएसटी के बैंकर के पास चयनि‍त छात्रों की सूची भेज दी जाती है। बैंक से इस प्रकार प्राप्‍त पुरस्‍कार वारंटों को जि‍ला स्‍तरीय शि‍क्षा अधि‍कारि‍यों के माध्‍यम से चयनि‍त पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं तक पहुंचाने के लि‍ए राज्‍यस्‍तरीय अधि‍कारि‍यों के पास भेज दि‍या जाता है।
जिला स्तरीय माडल प्रदर्शनी राजकीय बालिका इंटर कालेज नई टिहरी
कार्यान्‍वयन की मौजूदा स्‍थि‍ति‍:इस योजना में प्रति‍वर्ष दो लाख पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं के हि‍साब से पंचवर्षीय योजना अवधि‍ के दौरान एक मि‍लि‍यन (10 लाख) छात्रों के चयन का लक्ष्‍य रखा गया है। देश में छठी से लेकर 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई कराने वाले लगभग 4.5 से लेकर पांच लाख स्‍कूल हैं। यह योजना दि‍सम्‍बर 2009 के दौरान शुरू की गयी थी। हालांकि‍ इसका कार्यान्‍वयन 2009-10 में ही शुरू हो पाया था तथा वर्ष के दौरान 1.26 लाख पुरस्‍कर मंजूर कि‍ए गए थे। इसके अलावा वर्ष 2010-11 के दौरान 2.50 लाख पुरस्‍कार मंजूर कि‍ए गए थे और अब तक 5,36,598 पुरस्‍कार मंजूर कि‍ए गए हैं और इन्‍सपायर पुरस्‍कार वारंटों के रूप में चयनि‍त छात्रों के पास 268.30 करोड़ रुपये की धनराशि‍ भेजी जा चुकी है।
           योजना की शुरूआत से लेकर डीएलईपीएससी में दो लाख से अधि‍क पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं ने भाग लि‍या है और डीएलईपीसी के चयनि‍त लगभग 15 हजार पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं ने एसएलईपीसी में भाग लि‍या है और 14-16 अगस्‍त, 2011 के दौरान नई दि‍ल्‍ली में आयोजि‍त अब तक के पहले एनएलईपीसी में लगभग 700 पुरस्‍कार प्राप्‍तकर्ताओं ने भाग लि‍या। इस योजना में सभी 35 राज्‍य/केन्‍द्रशासि‍त प्रदेश भाग ले रहे हैं।
      डीएलईपीसी, एसएलइ्रपीसी से संबंधि‍त व्‍यय को पूरा करने के लि‍ए इलेक्‍ट्रानि‍क फंड ट्रांसफर के माध्‍यम से राज्‍य के नॉडल अधि‍कारी के पास उनके अधि‍सूचि‍त बैंक खाते में धनराशि‍भेज दी जाती है। डीएलईपीसी/एसएलईपीसी/एनएलईपीसी से संबंधि‍त व्‍यय को पूरा करने के लि‍ए राज्‍यों/केन्‍द्रशासि‍त प्रदेशों के लि‍ए अब तक 74.52 करोड़ रुपये जारी कि‍ए जा चुके हैं।
        12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के दौरान इस योजना के जारी रहने की संभावना है। यह संभव है कि‍इसका दायरा भी बढ़ाया जा सकता है और इसके अधीन प्रति‍वर्ष प्रति‍स्‍कूल एक पुरस्‍कार को मंजूरी देने का प्रस्‍ताव सरकार के वि‍चारधीन है। यदि‍इसे मंजूरी मि‍लती है तो इसका अर्थ यह होगा कि‍पंचवर्षीय योजना अवधि‍के दौरान प्रति‍वर्ष लगभग चार लाख पुरस्‍कारों के हि‍साब से दो मि‍लि‍यन (20 लाख) पुरस्‍कार को मंजूरी मि‍लेगी, इससे देश के 4.5 से लेकर पांच लाख स्‍कूलों में से लगभग 80 से 90 प्रति‍शत स्‍कूलों की भागीदारी संभव हो सकेगी।
विकासखंड जाखणीधार टिहरी गढ़वाल के बाल वैज्ञानिक व मार्गदर्शक शिक्षक 
           यदि कक्षा 6 से कक्षा 10 तक के बच्चे में वैज्ञानिक रचनात्मकता है तो सरकार उसे 30 हजार रुपये तक धनराशि दे सकती है। यह पैसा इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के अंतर्गत दिया जाएगा। जिला स्तर पर चयनित प्रतिभागियों को मॉडल बनाने को 10000 रुपये दिए जाएंगे। उसके बाद राज्य स्तर पर चयनित 10 प्रतिशत विद्यार्थियों को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।  साथ-साथ उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित नवाचारी उत्सव में शामिल होने का मौका भी मिलेगा। सम्बंधित संस्थाध्यक्ष अपने स्कूल के छात्रों का चयन कर कर ले। फिर उनका बैंक खाता विवरण, आधार संख्या, फोटो और नवाचारी मॉडल की रूपरेखा के साथ थीम अपलोड करें। इसकी विस्तृत गाइडलाइन और प्रक्रिया वेबसाइट www.inspireawards_dst.gov.in पर उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए जिला समन्वयक ए एन दूवे से 7060736098 व ब्लॉक कोर्डिनेटर जाखणीधार सुशील डोभाल से 9412920543 पर संपर्क किया जा सकता है।  http://jakhnidhargic.blogspot.in/2017/08/blog-post_28.html









इस प्रकार के आइडिया अपलोड न किये जांय

         किताबों में दिए गए उदाहरण जैसे- पन बिजली परियोजना, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, खेतों एवं घरों के लिए वाटर लेवल इंडिकेटर या अलार्म, मल्टीपर्पज छाता, इको फ्रेंडली चूल्हा, जैव उर्जा, ग्रीन हाउस इफेक्ट, जैविक खाद, पत्र पेटी सूचना तंत्र, स्मार्ट विलेज, माडर्न सिक्योरिटी होम, डायनमो, सोलर इनर्जी, सोलर कूकर, बायोगैस, ट्रैफिक कंट्रोल, स्मार्ट फोन व ब्लूटूथ डिवाइस से सम्बंधित प्रोजेक्ट, हाइड्रो प्रोजेक्ट्स तथा आलू, नीबू या अन्य फलों से बिजली बनाया जाना  आदि ऐसे विचार विल्कुल न दिए जांय जिनकी खोज पूर्व में हो चुकी है. साथ ही यह भी ध्यान रखा जाय की बाजार में बिकने वाले तैयार माडल इंस्पायर आवार्ड कार्यक्रम में प्रतिबंधित हैं. मार्गदर्शक शिक्षक छात्रों को उनके ऐसे मौलिक विचारों का बाहर लाने के लिए प्रेरित करें जो  अनुसंधानात्मक विषय होने के साथ साथ समाज के लिए उपयोगी भी हो.

 अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें http://www.inspireawards-dst.gov.in/UserP/index.aspx 

विकासखंड जाखणीधार टिहरी गढ़वाल के अंतर्गत संचालित उच्च प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों की सूची जहाँ से बाल वैज्ञानिकों का इंस्पायर अवार्ड 2018-19  के लिए  नामांकन किया गया है, (20 अगस्त 2018  के अनुसार)

योजना के अंतर्गत बाल वैज्ञानिकों के नामांकन के अंतिम तिथि ३१ अगस्त 2018 तक बढ़ाई गयी है. अनेक विद्यालयों से छात्रों का नामांकन मानकों के अनुसार नहीं किया गया है, ऐसे विद्यालयों की सूची 25 अगस्त के बाद यहाँ उपलव्ध करवाई जायेगी.उपरोक्त सूची में किसी भी प्रकार के संशोधन अथवा सुझाव के लिए पोस्ट के अंत में कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट करें.

Tuesday, 1 August 2017

जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पहुंची छात्र-छात्राओं के बीच.


जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित माध्यमिक स्तर के छात्र-छात्राएं अपनी समस्या सीधे डीएम से साझा कर सकेंगे। छात्रों से बात करने के लिए डीएम ने दूरभाष नंबर 01376-234555 का शुभारंभ किया है। उन्होंने कहा कि अब छात्रों को अपनी समस्या उच्चाधिकारियों को बताने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। छात्र दूरभाष पर सुबह 11 से 12 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।












Tuesday, 25 July 2017

मुगल सैना की नाक काटने वाली गढ़वाल की रानी कर्णावती



मुगल सैना की नाक काटने वाली गढ़वाल की रानी कर्णावती

     

इतिहास में कर्णावती नाम की दो रानियों का उल्लेख मिलता है ! इनमें एक चित्तौड के शासक राणा संग्राम सिंह की पत्नी थी. जिन्होंने अपने राज्य को गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के हमले से बचाने के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजी थी जबकि दूसरी गढवाल की शासिका थीं ! इतिहास में गढवाल की रानी का उल्लेख नाक काटने वाली रानी के नाम से मिलता है ! गढ़वाल की इस रानी ने पूरी मुगल सेना की बाकायदा सचमुच नाक कटवायी थी ! कुछ इतिहासकारों ने इस रानी का उल्लेख नाक काटने वाली रानी के रूप में किया है !

रानी कर्णावती ने गढ़वाल में अपने नाबालिग बेटे पृथ्वीपतिशाह के बदले उस समय शासन सूत्र संभाले थे, जब दिल्ली में मुगल सम्राट शाहजहां का राज था ! शाहजहां के कार्यकाल पर बादशाहनामा या पादशाहनामा लिखने वाले अब्दुल हमीद लाहौरी ने भी गढ़वाल की इस रानी का जिक्र किया है ! शम्सुद्दौला खान ने 'मासिर अल उमरा' में गढ़वाल की रानी कर्णावती  का उल्लेख किया है ! इटली के लेखक निकोलाओ मानुची जब सत्रहवीं सदी में भारत आये थे तब उन्होंने शाहजहां के पुत्र औरंगजेब के समय मुगल दरबार में काम किया था ! उन्होंने अपनी किताब 'स्टोरिया डो मोगोर' यानि 'मुगल इंडिया' में गढ़वाल की एक रानी के बारे में बताया है जिसने मुगल सैनिकों की नाट काटी थी !

रानी कर्णावती पवार वंश के राजा महिपतशाह की पत्नी थी ! यह वही महिपतशाह थे जिनके शासन में रिखोला लोदी और माधोसिंह जैसे सेनापति हुए थे जिन्होंने तिब्बत के आक्रांताओं को छठी का दूध याद दिलाया था ! माधोसिंह के बारे में गढ़वाल में काफी किस्से प्रचलित हैं ! पहाड़ का सीना चीरकर अपने गांव मलेथा में पानी लाने की कहानी भला किस गढ़वाली को पता नहीं होगी ! 

        इतिहास की किताबों से पता चलता है कि रिखोला लोदी और माधोसिंह जैसे सेनापतियों की मौत के बाद महिपतशाह भी जल्द स्वर्ग सिधार गये ! महिपतशाह की मृत्यु के पश्चात उनकी विधवा रानी कर्णावती ने सत्ता संभाली ! तब उनके पुत्र पृथ्वीपतिशाह केवल सात साल के थे, अतः रानी कर्णावती ने एक संरक्षिका शासिका के रूप में शासन किया ! वे अपनी विलक्षण बुध्दि एवं गौरवमय व्यक्तित्व के लिए प्रसिध्द हुईं ! अपने पुत्र के नाबालिग होने के कारण वह कर्तव्यवश जन्मभूमि गढवाल के हित के लिए अपने पति की मृत्यु पर सती नहीं हुईं और बडे धैर्य और साहस के साथ उन्होंने पृथ्वीपति शाह के संरक्षक के रूप में राज्यभार संभाला ! रानी कर्णावती ने राजकाज संभालने के बाद अपनी देखरेख में शीघ्र ही शासन व्यवस्था को सुद्यढ किया ! गढवाल के प्राचीन ग्रंथों और गीतों में रानी कर्णावती की प्रशस्ति में उनके द्वारा निर्मित बावलियों. तालाबों , कुओं आदि का वर्णन आता है ! 

एक ऐतिहासिक संयोग के चलते वर्ष 1634 में बदरीनाथ धाम की यात्रा के दौरान छत्रपति शिवाजी के गुरु समर्थ रामदास की गढवाल के श्रीनगर में सिख गुरु हरगोविन्द सिंह से भेंट हुई ! इन दो महापुरषों की यह भेंट बडी महत्वपूर्ण थी क्योंकि दोनों का एक ही उद्देश्य था,मुगलों के बर्बर शासन से मुक्ति प्राप्त करके हिन्दू धर्म की रक्षा करना। देवदूत के रूप में समर्थ गुरु स्वामी रामदास 1634 में श्रीनगर गढवाल पधारे और रानी कर्णावती को उनसे भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । समर्थ गुरु रामदास ने रानी कर्णावती से पूछा कि क्या पतित पावनी गंगा की सप्त धाराओं से सिंचित भूखंड में यह शक्ति है कि वैदिक धर्म एवं राष्ट्र की मार्यादा की रक्षा के लिये मुगल शक्ति से लोहा ले सके ! इस पर रानी कर्णावती ने विनम्र निवेदन किया पूज्य गुरुदेव , इस पुनीत कर्तव्य के लिये हम गढवाली सदैव कमर कसे हुए उपस्थित हैं ! 

इससे पहले जब महिपतशाह गढ़वाल के राजा थे तब 14 फरवरी 1628 को शाहजहां का राज्याभिषेक हुआ था ! जब वह गद्दी पर बैठे तो देश के तमाम राजा आगरा पहुंचे थे ! महिपतशाह आगरा नहीं गये ! इसके दो कारण माने जाते हैं ! पहला यह कि पहाड़ से आगरा तक जाना तब आसान नहीं था और दूसरा उन्हें मुगल शासन की अधीनता स्वीकार नहीं थी ! कहा जाता है कि शाहजहां इससे चिढ़ गया था ! इसके अलावा किसी ने मुगल शासकों को बताया कि गढ़वाल की राजधानी श्रीनगर में सोने की खदानें हैं ! महीपति शाह के शासनकाल में मुगल सेना गढवाल विजय के बारे में सोचती भी नहीं थी, लेकिन जब वह युध्द में मारे गए और रानी कर्णावती ने गढवाल का शासन संभाला तब मुगल शासकों ने सोचा कि उनसे शासन छीनना सरल होगा ! शाहजहां को समर्थ गुरु रामदास और गुरु हरगोविन्द सिंह के श्रीनगर पहुंचने और रानी कर्णावती से सलाह मशविरा करने की खबर लग गयी थी ! नजाबत खां नाम के एक मुगल सरदार को गढवाल पर हमले की जिम्मेदारी सौंपी गयी और वह 1635 में एक विशाल सेना लेकर आक्रमण के लिये आया ! उसके साथ पैदल सैनिकों के अलावा घुडसवार सैनिक भी थे !

ऐसी विषम परिस्थितियों में रानी कर्णावती ने सीधा मुकाबला करने के बजाय कूटनीति से काम लेना उचित समझा ! गढ़वाल की रानी कर्णावती ने उन्हें अपनी सीमा में घुसने दिया लेकिन जब वे वर्तमान समय के लक्ष्मणझूला से आगे बढ़े तो उनके आगे और पीछे जाने के रास्ते रोक दिये गये ! गंगा के किनारे और पहाड़ी रास्तों से अनभिज्ञ मुगल सैनिकों के पास खाने की सामग्री समाप्त होने लगी ! उनके लिये रसद भेजने के सभी रास्ते भी बंद थे ! 

मुगल सेना कमजोर पड़ने लगी और ऐसे में सेनापति ने गढ़वाल के राजा के पास संधि का संदेश भेजा लेकिन उसे ठुकरा दिया गया ! मुगल सेना की स्थिति बदतर हो गयी थी ! रानी चाहती तो उसके सभी सैनिकों का खत्म कर देती लेकिन उन्होंने मुगलों को सजा देने का नायाब तरीका निकाला ! रानी ने संदेश भिजवाया कि वह सैनिकों को जीवनदान दे सकती है लेकिन इसके लिये उन्हें अपनी नाक कटवानी होगी ! सैनिकों को भी लगा कि नाक कट भी गयी तो क्या जिंदगी तो रहेगी ! मुगल सैनिकों के हथियार छीन लिए गये और आखिर में उन सभी की एक एक करके नाक काट दी गयी ! कहा जाता है कि जिन सैनिकों की नाक का​टी गयी उनमें सेनापति नजाबत खान भी शामिल था ! वह ​इससे काफी शर्मसार था और उसने मैदानों की तरफ लौटते समय अपनी जान दे दी ! उस समय रानी कर्णाव​ती की सेना में एक अधिकारी दोस्त बेग हुआ करता था जिसने मुगल सेना को परास्त करने और उसके सैनिकों को नाक कटवाने की कड़ी सजा दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी ! 

इस तरह मोहन चट्टी में मुगल सेना को नेस्तनाबूद कर देने के बाद रानी कर्णावती ने जल्द ही पूरी दून घाटी को भी पुन: गढवाल राज्य के अधिकार क्षेत्र में ले लिया ! गढवाल की उस नककटवा रानी ने गढवाल राज्य की विजय पताका फिर शान के साथ फहरा दी और समर्थ गुरु रामदास को जो वचन दिया था, उसे पूरा करके दिखा दिया ! रानी कर्णावती के राज्य की संरक्षिका के रूप में 1640 तक शासनारूढ रहने के प्रमाण मिलते हैं लेकिन यह अधिक संभव है कि युवराज पृथ्वीपति शाह के बालिग होने पर उन्होंने 1642 में उन्हें शासनाधिकार सौंप दिया होगा और अपना बाकी जीवन एक वरिष्ठ परामर्शदात्री के रूप में बिताया होगा !

कुछ इतिहासकारों के अनुसार कांगड़ा आर्मी के कमांडर नजाबत खान की अगुवाई वाली मुगल सेना ने जब दून घाटी और चंडीघाटी (वर्तमान समय में लक्ष्मणझूला) को अपने कब्जे में कर दिया तब रानी कर्णावती ने उसके पास संदेश भिजवाया कि वह मुगल शासक शाहजहां के लिये जल्द ही दस लाख रूपये उपहार के रूप में भेज देगी ! नजाबत खान लगभग एक महीने तक पैसे का इंतजार करता रहा ! इस बीच गढ़वाल की सेना को उसके सभी रास्ते बंद करने का मौका मिल गया ! मुगल सेना के पास खाद्य सामग्री की कमी पड़ गयी और इस बीच उसके सैनिक एक अज्ञात बुखार से पीड़ित होने लगे ! गढ़वाली सेना ने पहले ही सभी रास्ते बंद कर दिये थे और उन्होंने मुगलों पर आक्रमण कर दिया ! रानी के आदेश पर सैनिकों की नाक काट दी गयी ! नजाबत खान जंगलों से होता हुआ मुरादाबाद तक पहुंचा था ! कहा जाता है कि शाहजहां इस हार से काफी शर्मसार हुआ था ! शाहजहां ने बाद में अरीज खान को गढ़वाल पर हमले के लिये भेजा था लेकिन वह भी दून घाटी से आगे नहीं बढ़ पाया था ! बाद में शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने भी गढ़वाल पर हमले की नाकाम कोशिश की थी !  साभार - http://www.krantidoot.in

Wednesday, 12 July 2017

Govt. Inter College Jakhnidhar in Pictures











जाने, आखिर क्या है GST बिल और क्या होंगे इसके फायदे?

क्या है जीएसटी ? 

      गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं। सरकार जीएसटी  बिल को एक जुलाई  से लागू कर चुकी है और अब हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा।क्या होंगे इसके फायदे? 

-संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगा सकती हैं।-अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी लागू होने से देश की जीडीपी में एक से पौने दो फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

किन उत्पादों पर लागू होगा जीएसटी? 

-2014 में पास संविधान के 122वें संशोधन के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा। सिर्फ अल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी।

 कैसे काम करेगा जीएसटी?
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जीएसटी में तीन अंग होंगे केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी।
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केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा जबकि राज्य जीएसटी राज्य सरकारें लागू करेंगी।
 
अगर जीएसटी भी वैट की तरह है तो फिर इसकी जरूरत क्यों?
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हालांकि जीएसटी भी वैट जैसा ही टैक्स है, लेकिन इसके लागू होने से कई और तरह के टैक्स नहीं लगेंगे।
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इतना ही नहीं जीएसटी लागू होने से अभी लगने वाले वैट और सेनवेट दोनों खत्म हो जाएंगे।
किसी भी राज्य में सामान का एक दाम
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जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा. पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। जैसे कोई कार अगर आप दिल्ली में खरीदते हैं तो उसकी कीमत अलग होती है, वहीं किसी और राज्य में उसी कार को खरीदने के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ती है। इसके लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा।
कर विवाद में कमी
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अगर यह लागू हो जाता है तो कई बार टैक्स देने से छुटकारा मिल जाएगा। इससे कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी कम हो जाएगी। एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे। इसके अलावा जहां कई राज्यों में राजस्व बढ़ेगा तो कई जगह कीमतों में कमी भी होगी।
कम होगी सामान की कीमत
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इसके लागू होने से टैक्स का ढांचा पारदर्शी होगा जिससे काफी हद तक टैक्स विवाद कम होंगे। इसके लागू होने के बाद राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि भी खत्म हो जाएंगे। फिलहाल जो सामान खरीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।
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जीएसटी लागू होने पर कंपनियों और व्यापारियों को भी फायदा होगा. सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी. जब सामान बनाने की लागत घटेगी तो इससे सामान सस्ता भी होगा।
किसको होगा नुकसान
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जीएसटी लागू होने से केंद्र को तो फायदा होगा लेकिन राज्यों को इस बात का डर था कि इससे उन्हें नुकसान होगा क्योंकि इसके बाद वे कई तरह के टैक्स नहीं वसूले पाएंगे जिससे उनकी कमाई कम हो जाएगी। गौरतलब है कि पेट्रोल व डीजल से तो कई राज्यों का आधा बजट चलता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने राज्यों को राहत देते हुए मंजूरी दे दी है कि वे इन वस्तुओं पर शुरुआती सालों में टैक्स लेते रहें। राज्यों का जो भी नुकसान होगा, केंद्र उसकी भरपाई पांच साल तक करेगा।

"सुशील डोभाल, प्रवक्ता अर्थशास्त्र. विद्यालयी शिक्षा विभाग उत्तराखंड"



उर्जा संरक्षण दिवस पर स्कूली बच्चों द्वारा आयोजित की गयी ऑनलाइन ड्राइंग प्रतियोगिता की कुछ झलकें