Saturday, 28 July 2018

महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिवस

सुशील डोभाल.

यह पेज हमारे उन विद्यार्थियों और पाठकों के लिए समर्पित है जो भारत एवं विश्व के महत्वपूर्ण दिवसों के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं. महत्वपूर्ण दिवसों के साथ ही इन दिवसों के आयोजन से जुड़े तथ्यों का भी उल्लेख करने का प्रयास किया गया है. आशा करता हूँ की विद्यार्थियों और पाठकों के साथ ही समस्त शैक्षिणिक संस्थाओं के लिए यह पोस्ट उपयोगी सावित हो सकेगी. 

जनवरी:

1 जनवरी: अंतराष्ट्रीय परिवार दिवस (ग्लोबल फॅमिली डे)
9 जनवरी: प्रवासी भारतीय दिवस (एन. आर. आई. डे)
सबंधित जानकारी: भारत में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला “प्रवासी भारतीय दिवस” महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रिका से बॉम्बे लौटने के दिन (9 जनवरी 1915) को याद करते हुए मनाया जाता है यह दिन विदेशों में बसे भारतीयों को समर्पित है
10 जनवरी: विश्व लाफ्टर दिवस (वर्ल्ड लाफ्टर डे)
12 जनवरी: राष्ट्रीय युवा दिवस (नेशनल यूथ डे)
सबंधित जानकारी: स्वामी विवेकानन्द जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था भारतीय वेदान्त तथा योग को यूरोपीय देशों तक पहुंचाने का श्रेय इन्हें ही जाता है यह दिन देश के युवाओं को समर्पित है
15 जनवरी: थल सेना दिवस (आर्मी डे)
सबंधित जानकारी: थल सेना दिवस भारत की थल सेना तथा इसके जवानों को समर्पित है 15 जनवरी 1949 को भारतीय थल सेना के प्रथम कमांडर इन चीफ “के.एम. करिअप्पा” ने पद गृहण किया था इसलिए 15 जनवरी को हर वर्ष थल सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है
23 जनवरी: नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती
25 जनवरी: राष्ट्रीय पर्यटन दिवस (नेशनल टूरिज्म डे)
सबंधित जानकारी: देश में पर्यटन को बढ़ावा देने व देश की जनता को पर्यटन का महत्व समझाने के उद्देश्य से हर वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के रूप में मनाया जाता है जबकि विश्व पर्यटन दिवस 27 सितम्बर को मनाया जाता है
26 जनवरी: गणतंत्र दिवस (रिपब्लिक डे)
सबंधित जानकारी: भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था उसी के उपलक्ष्य में हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है इसी दिन को विश्व स्तर पर अंतराष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस के रूप में भी मनाया जाता है
28 जनवरी: लाला लाजपत राय जयंती
29 जनवरी: डेटा सरंक्षण दिवस (डेटा प्रोटेक्शन डे)
30 जनवरी: शहीद दिवस (मार्टीर डे)
सबंधित जानकारी: 30 जनवरी 1949 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी गांधी जी व सभी शहीदों को श्रधांजलि स्वरूप प्रत्येक वर्ष 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है भारत में इस दिन के अतिरिक्त अनेक दिनों को भी शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है जिसमें 23 मार्च (भगत सिंह शहीदी दिवस) प्रमुख है
फरवरी:
4 फरवरी: विश्व कैंसर दिवस (वर्ल्ड कैंसर डे)
12 फरवरी: डार्विन दिवस (डार्विन डे)
13 फरवरी: सरोजिनी नायडू जयंती
14 फरवरी: वलेंटाइन दिवस (वलेंटाइन डे)
20 फरवरी: विश्व सामाजिक न्याय दिवस (वर्ल्ड डे ऑफ़ सोशल जस्टिस)
21 फरवरी: अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (इंटरनेशनल मदर लैंग्वेज डे)
24 फरवरी: केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस (सेंट्रल एक्साइज डे)
सबंधित जानकारी: पूरे देश में उत्पाद शुल्क के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने तथा शुल्क चोरी (भ्रष्टाचार) से निपटने हेतु जागरूक करने के उद्देश्य से केन्द्रीय उत्पाद शुल्क दिवस हर वर्ष 24 फरवरी को मनाया जाता है
28 फरवरी: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (नेशनल साइंस डे)
सबंधित जानकारी: सर सी.वी. रमन ने 28 फरवरी 1928 को अपनी खोज जिसे “रमन इफ़ेक्ट” नाम से जाना जाता है, को सार्वजनिक किया था देश में विज्ञान के प्रति लोगों को जागरूक करने व इसका महत्व समझाने हेतु 28 फरवरी को हर वर्ष “राष्ट्रीय विज्ञान दिवस” के रूप में मनाया जाता है
मार्च:
ध्यान दें: मार्च के हर “द्वितीय गुरूवार” को “विश्व किडनी दिवस” के रूप में मनाया जाता है
4 मार्च: राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस (नेशनल सिक्यूरिटी डे)
8 मार्च: अंतराष्ट्रीय महिला दिवस (इंटरनेशनल विमेंस डे)
सबंधित जानकारी: एतिहासिक तौर पर यह दिवस महिलाओं के वोट अधिकार से सबंधित है विश्व भर के देशों द्वारा प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को मनाए जाने वाले महिला दिवस को उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना, उन्हें बराबर के अधिकार देना, उनका सम्मान करना तथा पुरूष प्रधान समाज वाली सोच पर चोट करना है इस दिन महिलाओं द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव मनाया जाता है
15 मार्च: विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस (वर्ल्ड कन्ज्यूमर राईटस डे)
सबंधित जानकारी: विश्व भर के उपभोक्ता चाहे वे किसी भी क्षेत्र से हों, के अधिकारों की सुरक्षा हेतु प्रत्येक वर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है इसी दिन को “विश्व विकलांग दिवस” के रूप में भी आयोजित किया जाता है
21 मार्च: विश्व वन दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ़ फारेस्ट)
सबंधित जानकारी: विश्व में वनों का तेजी से हो रहा पतन रोकने व इसके घातक परिणामों के बारे में लोगों को सजग करने के उद्देश्य से 21 मार्च को “विश्व वन दिवस” घोषित किया गया है प्रथम बार 21 मार्च 2013 को विश्व वन दिवस को रूप में मनाया गया था यह दिन निवारण दिवस तथा वानिकी दिवस के रूप में भी जाना जाता है
22 मार्च: विश्व जल दिवस (वर्ल्ड वाटर डे)
सबंधित जानकारी: पीने योग्य स्वच्छ पानी को प्रदूषित होने से बचाना व इस के प्राक्रतिक संसाधनों के बचाव के उद्देश्य से विश्व जल दिवस 1993 से प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है
23 मार्च: विश्व मौसम विज्ञान दिवस (वर्ल्ड मेट्रोलोजिकल डे)
सबंधित जानकारी: इस दिन विश्व के मौसम विज्ञानी एक जगह एकत्रित होकर अपना अनुभव एक दुसरे से बांटते हैं तथा विश्व स्तर पर होने वाले मौसमी प्रभावों पर अपने पक्ष रखते हैं विश्व मौसम विज्ञान दिवस हर वर्ष 23 मार्च को मनाया जाता है भारत में इस दिन का महत्व “भगत सिंह शहीदी दिवस” के रूप में भी है क्योंकि इस दिन भारत का आज़ादी के लिए संघर्षरत भगत सिंह को ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी दी गई थी
24 मार्च: विश्व तापेदिक/ क्षयरोग दिवस (वर्ल्ड टी.बी. डे)
सबंधित जानकारी: ट्यूबरक्लोसिस (टी.बी.) डे के नाम से प्रसिद्ध 24 मार्च के दिन लोगों को इस बिमारी के प्रति सचेत किया जाता है तथा इसके विपरीत परिणामों के बारे में अवगत कराया जाता है इस दिन को मनाने का उद्देश्य तपेदिक/ क्षयरोग को जड़ से ख़त्म करना है
27 मार्च: विश्व रंगमंच दिवस (वर्ल्ड थिएटर डे)
अप्रैल:
2 अप्रैल: विश्व आटिज्म जागरूकता दिवस (वर्ल्ड आटिज्म अवेयरनेस डे)
5 अप्रैल: राष्ट्रीय मेरीटाइम दिवस (नेशनल मेरीटाइम डे)
6 अप्रैल: अंतराष्ट्रीय खेल दिवस: विकास एंव शान्ति के लिए (इंटरनेशनल डे ऑफ़ सपोर्ट फॉर डेवलपमेंट एंड पीस)
सबंधित जानकारी: विभिन्न देशों के मध्य खेलों द्वारा सांस्कृतिक विषमताएं हटाने व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर विकास तथा शांति के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 6 अप्रैल को अन्तराष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है
7 अप्रैल: विश्व स्वास्थ्य दिवस (वर्ल्ड हेल्थ डे)
सबंधित जानकारी: वर्ष 1948 में विश्व स्वास्थ्य सगंठन की प्रथम सभा 7 अप्रैल को हुई थी इसी सभा में इस दिन को विश्व स्वास्थ्य दिवस घोषित किया गया था फलस्वरूप वर्ष 1950 से 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जा रहा है इसका उद्देश्य विश्व जनसँख्या के स्वास्थ्य की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करना है
18 अप्रैल: विश्व विरासत दिवस (वर्ल्ड हेरिटेज डे)
सबंधित जानकारी: वर्ष 1983 में 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस घोषित किया गया इसका उद्देश्य लोगों को अपने देश व विश्व स्तर पर सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने हेतु प्रयासरत करना है
22 अप्रैल: विश्व पृथ्वी दिवस (अर्थ डे)
सबंधित जानकारी: पृथ्वी दिवस की शुरूआत वर्ष 1970 में हुई थी इसका उद्देश्य लोगों को प्रयावरण बचाने हेतु प्रेरित करना है आज 192 से भी अधिक देशों में 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है
23 अप्रैल: विश्व पुस्तक एंव कॉपीराइट दिवस (वर्ल्ड बुक एंड कॉपीराइट डे)
25 अप्रैल: विश्व मलेरिया दिवस (वर्ल्ड मलेरिया डे)
29 अप्रैल: अंतराष्ट्रीय नृत्य दिवस (इंटरनेशनल डांस डे)
मई:
1 मई: विश्व श्रमिक दिवस (इंटरनेशनल लेबर डे)
सबंधित जानकारी: श्रमिकों की उपलब्धियों के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 1 मई को विश्व श्रमिक दिवस मनाया जाता है कई देशों में इस दिन वार्षिक छुट्टी घोषित है इस दिन को “इंटरनेशनल वर्कर्स डे” भी कहा जाता है देशों में श्रमिक दिवस मनाने की तिथियों में अंतर है
3 मई: विश्व प्रेस स्वतंत्रा दिवस (वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे)
(ध्यान दें: 3 मई को अन्तराष्ट्रीय सूर्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है)
सबंधित जानकारी: 3 मई विश्व भर की स्वतंत्र पत्रकारिता का प्रतिक है इस दिन को पत्रकारिता की स्वतंत्रता का महत्व दर्शाने हेतु विश्व प्रेस स्वतंत्रा दिवस के रूप में मनाया जाता है
8 मई: विश्व रेडक्रॉस दिवस (वर्ल्ड रेडक्रॉस डे)
सबंधित जानकारी: अंतराष्ट्रीय रेड क्रॉस आन्दोलन के आदर्शों के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु प्रत्येक वर्ष 8 मई को “विश्व रेडक्रॉस दिवस” मनाया जाता है इस दिन को अन्तराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के मुखर नेता जीन हेनरी दुनांत का जन्मदिवस (8 मई 1828) होने के कारण चुना गया है रेड क्रॉस आन्दोलन का उद्देश्य मानव जीवन, मानव स्वास्थ्य तथा मानव सम्मान को बचाना व बढ़ावा देना है
9 मई: विजय दिवस (विक्ट्री डे)
11 मई: राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी दिवस (नेशनल टेक्नोलॉजी डे)
12 मई: अंतराष्ट्रीय नर्स दिवस (इंटरनेशनल नर्सेज डे)
14 मई: विश्व प्रवासी दिवस (वर्ल्ड माइग्रेटरी डे)
17 मई: विश्व दूरसंचार दिवस (वर्ल्ड टेलीकम्यूनिकेशन डे)
सबंधित जानकारी: विश्व भर में फैले दूरसंचार जाल को अधिक सशक्त बनाने व इसके महत्व को दर्शाने के लिए विश्व दूरसंचार दिवस हर वर्ष 17 मई को अंतराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है वर्ष 1876 में टेलीफोन की खोज से शुरू हुई दूरसंचार व्यवस्था आज इन्टरनेट तक पहुँच चुकी है
21 मई: अंतकवाद विरोधी दिवस (एंटी-टेररिज्म डे)
24 मई: राष्ट्रमंडल दिवस (कामनवेल्थ डे)
31 मई: विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड नो टोबाको डे)
सबंधित जानकारी: 24 घंटे तक बिना किसी नशे के ज़िन्दगी जीना व नशे से लगातार दूर रहने के लिए लोगों को जागरूक करना विश्व तम्बाकू दिवस मनाए जाने का उद्देश्य है 31 मई के दिन तम्बाकू के स्वास्थ्य पर दुष्परिणामों के बारे में लोगों को अवगत कराया जाता है
जून:
(ध्यान दें: जून माह के “तृतीय रविवार” को “पिता दिवस” मनाया जाता है)
1 जून: वर्ल्ड मिल्क डे
सबंधित जानकारी: वर्ष 2001 से लगातार हर वर्ष 1 जून को “वर्ल्ड मिल्क डे” के रूप में मनाया जा रहा है इसका उद्देश्य दूध को एक खाद्य पदार्थ के रूप में विश्व भर में महत्व देना है दुग्ध उत्पादन तथा इस से जुड़े लोगों को अवसर प्रदान करने हेतु व दुग्ध उत्पादन के विकास के लिए “फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन” ने 2001 में इसकी शुरूआत की थी
5 जून: विश्व पर्यावरण दिवस (वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे)
सबंधित जानकारी: 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में वर्ष 1972 से मनाना शुरू किया गया था इसका उद्देश्य पर्यावरण को बचाने के लिए उचित कदम उठाने हेतु लोगों को प्रेरित करना है
8 जून: विश्व महासागर दिवस (वर्ल्ड ओसियन डे)
14 जून: विश्व रक्तदान दिवस (वर्ल्ड ब्लड डोनर डे)
20 जून: विश्व शरणार्थी दिवस (वर्ल्ड रिफ्यूजी डे)
21 जून: विश्व संगीत दिवस (वर्ल्ड म्यूजिक डे)
23 जून: सयुंक्त राष्ट्र लोक सेवा दिवस (यूनाइटेड नेशन पब्लिक सर्विस डे)
29 जून: राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (नेशनल स्टैटिस्टिकल डे)
सबंधित जानकारी: भारत के प्रसिद्ध वज्ञानिक एंव संख्यिकीविद प्रशान्त चन्द्र महालनोबिस के जन्म दिवस (29 जून 1893) को प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है महालनोबिस द्वितीय पंचवर्षीय योजना में अपने मसौदे के लिए जाने जाते हैं महालनोबिस भारतीय सांख्यिकी संस्थान का संस्थापक भी है
जुलाई:
1 जुलाई: राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (नेशनल डॉक्टर्स डे)
सबंधित जानकारी: देश चिकित्सकों को समर्पित “राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस” हर वर्ष 1 जुलाई को मनाया जाता है विश्व के सभी देशों में चिकित्सक दिवस की तिथियाँ भिन्न हैं तथा अलग-अलग व्यक्तियों को समर्पित हैं भारत में यह दिवस पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री एंव पेशे से चिकित्सक बिधान चंद्र राय के जन्म दिवस (1 जुलाई 1882) के रूप में मनाया जाता है
11 जुलाई: विश्व जनसंख्या दिवस (वर्ल्ड पापुलेशन डे)
सबंधित जानकारी: हर वर्ष 11 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व जनसंख्या दिवस के मुद्दे पर भारत की विशेष भूमिका रही है जनसँख्या के आधार पर भारत का विश्व में दूसरा स्थान है इस दिन का उद्देश्य लोगों तथा मीडिया का ध्यान बढती जनसँख्या की तरफ आकर्षित करना तथा इस पर नियंत्रण पाने हेतु प्रयास करना है
12 जुलाई: मलाला दिवस (मलाला डे)
18 जुलाई: नेल्सन मंडेला अंतराष्ट्रीय दिवस (नेल्सन मंडेला इंटरनेशनल डे)
अगस्त:
(ध्यान दें: अगस्त माह के “प्रथम रविवार” को “अंतराष्ट्रीय मित्रता दिवस” मनाया जाता है)
6 अगस्त: हिरोशिमा दिवस
सबंधित जानकारी: वर्ष 1945 में 6 अगस्त को जापान के हिरोशिमा तथा 9 अगस्त को नागासाकी पर परमाणु बम गिरा कर नष्ट कर दिया गया था द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम वर्ष में यू.एस. द्वारा किए गए इस हमले में लगभग सवा लाख लोग मारे गए थे हमले में मारे गए निर्दोषों को श्रधांजलि देने हेतु हर वर्ष 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस के रूप में मनाया जाता है
9 अगस्त: भारत छोडो दिवस (क्विट इंडिया डे) / नागासाकी दिवस (नागासाकी डे)
12 अगस्त: अंतराष्ट्रीय युवा दिवस (इंटरनेशनल यूथ डे)
15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस (इंडिपेंडेंस डे)
सबंधित जानकारी: 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश राज से भारत को आजादी मिली थी आज भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा इस दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित है
29 अगस्त: राष्ट्रीय खेल दिवस (नेशनल स्पोर्ट्स डे)
सबंधित जानकारी: “हॉकी के जादूगर” नाम से प्रसिद्ध ध्यान चन्द के जन्म दिवस (29 अगस्त 1905) को हर वर्ष राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है इस दिन “ध्यान चन्द राष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, नई दिल्ली” में हॉकी मैच आयोजित किए जाते हैं युवाओं को खलों की तरफ आकर्षित करना खेल दिवस की प्रमुख उद्देश्य है
सितम्बर:
5 सितम्बर: शिक्षक दिवस (टीचर्स डे)
सबंधित जानकारी: भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति “सर्वपल्ली राधाकृष्णन” जो कि पेशे से अध्यापक भी थे, उनके जन्म दिवस (5 सितम्बर 1888) को हर वर्ष शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है इस दिन सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया जाता है
8 सितम्बर: विश्व साक्षरता दिवस (इंटरनेशनल लिटरेसी डे)
सबंधित जानकारी: 8 सितम्बर का दिन यूनेस्को द्वारा “विश्व साक्षरता दिवस” घोषित किया गया है प्रथम बार “विश्व साक्षरता दिवस” वर्ष 1966 में मनाया गया था इस दिन का उद्देश्य समाज में साक्षरता को बढ़ावा देना व इसके महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना है
14 सितम्बर: राष्ट्रीय हिन्दी दिवस (हिन्दी डे)
सबंधित जानकारी: हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने तथा इसके विकास के लिए हर वर्ष 14 सितम्बर को “राष्ट्रीय हिन्दी दिवस” के रूप में मनाया जाता है हिन्दी विश्व की चौथी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है तथा 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी (देवनागरी लिपि) ने भारत गणतंत्र की आधिकारिक भाषा होने का गौरव प्राप्त किया आज यह भाषा भारत सहित विश्व के कई अन्य देशो में फ़ैल चुकी है
16 सितम्बर: विश्व ओजोन दिवस (इंटरनेशनल ओजोन डे)
सबंधित जानकारी: सयुंक्त राष्ट्र सामान्य सभा द्वारा “16 सितम्बर” को विश्व “ओजोन डे” का दर्जा दिया गया है सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को रोकने वाली ओजोन परत की रक्षा हेतु लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से यह दिन प्रत्येक वर्ष 16 सितम्बर को मनाया जाता है
21 सितम्बर: अंतराष्ट्रीय शान्ति दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ़ पीस)
सबंधित जानकारी: अंतराष्ट्रीय स्तर पर शान्ति व अहिंसा निति को अपनाने हेतु सभी राष्ट्रों से आग्रह करना ही इस दिन को मनाए जाने का प्रमुख उद्देश्य है हर वर्ष 21 सितम्बर को मनाए जाने वाले इस दिवस की शुरूआत वर्ष 1982 में हुई थी
27 सितम्बर: विश्व पर्यटन दिवस (वर्ल्ड टूरिज्म डे)
सबंधित जानकारी: 27 सितम्बर को वर्ष 1980 से “विश्व पर्यटन दिवस” के रूप में मनाया जा रहा है इस की शुरूआत सयुंक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने की थी इस दिवस का उद्देश्य विश्व स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देना है
अक्टूबर:
1 अक्टूबर: अंतराष्ट्रीय वृद्ध दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ़ द ओल्डर पर्सन)
2 अक्टूबर: गाँधी जयंती
सबंधित जानकारी: महात्मा गाँधी के जन्म दिवस (2 अक्टूबर 1869) को हर वर्ष “गांधी जयंती” के रूप में मनाया जाता है इसी दिन अंतराष्ट्रीय अहिंसा दिवस व लाल बहादुर शास्त्री जयंती भी मनाई जाती है
5 अक्टूबर: अंतराष्ट्रीय शिक्षक दिवस (इंटरनेशनल टीचर्स डे)
8 अक्टूबर: भारतीय वायुसेना दिवस (इंडियन एयर फ़ोर्स डे)
सबंधित जानकारी: भारतीय वायुसेना की आधिकारिक स्थापना दिनांक 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी इसी कारण 8 अक्टूबर को हर वर्ष भारतीय वायुसेना दिवस के रूप में मनाया जाता है यह दिन पूर्णत: देश की वायु सेना की उपलब्धियों को समर्पित है
9 अक्टूबर: विश्व डाक दिवस (वर्ल्ड पोस्ट ऑफिस डे)
सबंधित जानकारी: यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना की तिथि 9 अक्टूबर को हर वर्ष विश्व डाक दिवस के रूप में मना जाता है इस दिवस की शुरूआत वर्ष 1969 में की गई थी यह दिन लोगों को डाक सेवा का महत्व समझाने हेतु मनाया जाता है
10 अक्टूबर: राष्ट्रीय डाक दिवस (नेशनल पोस्ट डे)
16 अक्टूबर: विश्व खाद्य दिवस (वर्ल्ड फ़ूड डे)
सबंधित जानकारी: वर्ष 1945 में 16 अक्टूबर के दिन खाद्य एंव कृषि संगठन, सयुंक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी इसी महत्व के कारण 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस के रूप में मनाया जाता है खाद्य पदार्थों की सुरक्षा एंव गुणवत्ता को बनाए रखने हेतु प्रयास करना इस दिन को मनाए जाने का उद्देश्य है
24 अक्टूबर: सयुंक्त राष्ट्र दिवस (यूनाइटेड नेशन डे)
नवम्बर:
10 नवम्बर: मलाला दिवस (मलाला डे)
12 नवम्बर: राष्ट्रीय पक्षी दिवस (नेशनल बर्ड्स डे)
14 नवम्बर: बाल दिवस (चिल्ड्रेन्स डे)
सबंधित जानकारी: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (बच्चों में चाचा नेहरू के नाम से प्रसिद्ध) के जन्म दिवस (14 नवम्बर 1889) को हर वर्ष बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है इस दिन बच्चों के द्वारा, बच्चों के लिए विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा यह दिन देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है
17 नवम्बर: राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस (नेशनल जर्नलिज्म डे) / विश्व विद्यार्थी दिवस (वर्ल्ड स्टूडेंट डे)
सबंधित जानकारी: भारतीय प्रेस की स्वतंत्रता को समर्पित राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस प्रत्येक वर्ष 17 नवम्बर को मनाया जाता है इस दिवस को मनाए जाने की शुरूआत प्रेस स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर की गई थी इस दिवस का उद्देश्य भारतीय प्रेस का सही दिशा में विकास करना है
18 नवम्बर: विश्व व्यस्क दिवस (वर्ल्ड एडल्ट डे)
19 नवम्बर: विश्व नागरिक दिवस (वर्ल्ड सिटीजन्स डे)
26 नवम्बर: विश्व पर्यावरण सरंक्षण दिवस ()
दिसम्बर:
1 दिसम्बर: विश्व एड्स दिवस (वर्ल्ड एड्स डे)
सबंधित जानकारी: वर्ष 1988 से प्रत्येक वर्ष 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है सयुंक्त राष्ट्र द्वारा चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य विश्व स्तर पर एड्स के बारे में जागरूकता फैलाना है
4 दिसम्बर: नौसेना दिवस (नेवी डे)
सबंधित जानकारी: हर देश में नौसेना दिवस अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है भारत में “4 दिसम्बर” को नौसेना दिवस घोषित किया गया है इस दिन को भारत-पाक युद्ध 1971 में भारतीय नौसेना के योगदान तथा जीत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है
10 दिसम्बर: विश्व मानवाधिकार दिवस (ह्यूमन राइट्स डे)
सबंधित जानकारी: 10 दिसम्बर अंतराष्ट्रीय स्तर पर विश्व मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है सयुंक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस दिवस का उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा करना व उन्हें विश्व स्तर पर बनाए रखना है
18 दिसम्बर: अल्पसंख्यक अधिकार दिवस (माइनॉरिटी राइट्स डे)
23 दिसम्बर: किसान दिवस (फार्मर्स डे)
सबंधित जानकारी: भारत में हर वर्ष 23 दिसम्बर को राष्ट्रीय स्तर पर किसान दिवस मनाया जाता है भारत के गाँवों में रहने वाली 75% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है देश की जनसँख्या के इस हिस्से के विकास तथा कृषि के बारे में जागरूकता फैलाना ही इस दिवस का लक्ष्य है
24 दिसम्बर: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (नेशनल कंज्यूमर्स डे)
नोट- श्रोत- http://www.gk-in-hindi.com से आभार सहित.

Monday, 18 June 2018

माँ कालिंका का बटखेम में आलोकिक मंदिर.


जय कालिंका माता की.

महाकाल की काली। 'काली' का अर्थ है समय और काल। काल, जो सभी को अपने में निगल जाता है। भयानक अंधकार और श्मशान की देवी। वेद अनुसार 'समय ही आत्मा है, आत्मा ही समय है'। मां कालिका की उत्पत्ति धर्म की रक्षा और पापियों-राक्षसों का विनाश करने के लिए हुई है।
काली को माता जगदम्बा की महामाया कहा गया है। मां ने सती और पार्वती के रूप में जन्म लिया था। सती रूप में ही उन्होंने 10 महाविद्याओं के माध्यम से अपने 10 जन्मों की  शिव को झांकी दिखा दी थी।
नाम : माता कालिका             शस्त्र : त्रिशूल और तलवार
वार : शुक्रवार                   दिन : अमावस्या
ग्रंथ : कालिका पुराण             मंत्र : ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा
दुर्गा का एक रूप : माता कालिका 10 महाविद्याओं में से एक है.
मां काली के 4 रूप हैं- दक्षिणा काली, शमशान काली, मातृ काली और महाकाली।
राक्षस वध : माता ने महिषासुर, चंड, मुंड, धूम्राक्ष, रक्तबीज, शुम्भ, निशुम्भ आदि राक्षसों के वध किए थे।
कलियुग में 3 देवता जाग्रत कहे गए हैं- हनुमान, कालिका और भैरव। कालिका की उपासना जीवन में सुख, शांति, शक्ति, विद्या देने वाली बताई गई है। मां कालिका की भक्ति का प्रभाव व्यावहारिक जीवन में मानसिक, शारीरिक और सांसारिक बुराइयों के अंत के रूप में दिखाई देता है जिससे किसी भी इंसान के तनाव, भय और कलह का नाश हो जाता है।

माँ कालिंका के चमत्कार देखते हुए भक्तगण
    देवभूमि उत्तराखंड अनेक आलोकिक शक्तियों व चमत्कारों के ल‌िए व‌िश्वप्रस‌िद्घ हैं। यहाँ अनेक देवालय और मंदिर अपनी अनूठी विशेषताओं के लिए सदियों से जाने जाते हैं. मातारानी का एक मंदिर माता की चमत्कारी शक्तियों से श्रदालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जहाँ माता डोली में विराजमान होकर अपने भक्तों के बीच पहुंचकर न केवल उनपर अपना स्नेह और आशीर्वाद बरसाती है बल्कि उनके दुखों और बीमारियों का भी मौके पर ही निवारण करती है. 
         उत्तराखंड के जनपद टिहरी गढ़वाल के मुख्यालय नई टिहरी नगर से चंबा सडक मार्ग पर करीब ५ किमी की दूरी पर भोनाबागी नमक स्थान से करीब दो किमी दूरी पर बटखेम गाव स्थित है. जहाँ पर कालिंका माता का कुछ बर्षो पूर्व सुन्दर और मनोरम मंदिर बनाया गया है. प्रत्येक रविबार को हजारों की संख्या में यहाँ भक्त पहंचते हैं.  अगर आप मनोकामना लेकर जाएं तो आपको कुछ कहने की जरूरत नहीं है। माता खुद आपकी मनोकामना बताती है और  साथ ही उनका समाधान भी।  गंभीर बीमारी से पीड़ित हों या बुरी आत्माओं का प्रभाव, माता के दरवार में हर समस्या का सटीक समाधान होता है. चमत्कार को होते केवल भक्‍त ही नहीं बल्क‌ि  मंदिर परिसर में बैठे सैकड़ो भक्‍त भी देख सकते हैं। कहा जाता है क‌ि देवी का पश्वा (जिस व्यक्ति पर देवी अवतरित होती है) अपने हाथों पर सूखे चावलों को भिगोकर हरियाली (अंकुरित) में बदल देता है। इस मंद‌िर की एक मान्यता है कि माता के दर पर आने वाले कई निसंतान दंपति को  संतान का सुख जरूर म‌िलता है। माता के दरवार में प्रत्येक रविबार को दर्जनों निसंतान दम्पति संतान का आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं. जैसे के आप तस्वीर में भी देख सकते है की माता डोली में विराजमान होकर बता दें क‌ि एक एक निसंतान महिला को न केवल संतान का बरदान देती है बल्कि स्वास्थ सम्बन्धी समस्याओं का भी तुरंत निवारण करती है. ध्यान रखने वाली बात यह भी है की माता की डोली सैकड़ों के बीच पहंचकर अपने भक्तों को अपने पास बुलाती है और न केवल आशीर्वाद देती है बल्कि गलत कृत्यों पर पिटाई कर दण्डित भी करती है. जब पाश्वा के रूप में
माँ कालिंका की डोली
माता भैरव, हनुमान जी, माँ चन्द्रवदनी, माँ सुरकंडा, माँ कुंजापुरी व नव दुर्गा सहित अन्य देवी देवताओं का आवाहन करती है, तब समस्त देवी देवता अपने पाश्वों पर अवतरित होकर अनेक दिव्यलीलाओं से वातावरण को भावुक और भक्तिमय बना देते हैं. यह माता की चमत्कारिक शक्ति ही है की देवी अपनी डोली के शिखर पर लगे चांदी के विशाल छत्र से मंदिर की दीवार पर ख़ास भक्तों की समस्या और उसका समाधान ल‌िखती है। कुछ किस्मत वाले भक्तों को मंदिर में पहुँचते ही मातारानी अपने पास बुला लेती है जबकि कुछ लोगों को कई कई बार भी मंदिर में पहुँचने के बाद भी यह सौभाग्य प्राप्त नही हो पता. इस मंद‌िर में उत्तराखंड के ही नहीं बल्क‌ि द‌िल्ली,  मुंबई, राजस्थान से भी फरियादी आते हैं।
लेटकर माँगा जाता है संतान का वरदान
हिन्दू धर्म में सबसे जागृत देवी हैं मां कालिका। मां कालिका को खासतौर पर बंगाल और असम में पूजा जाता है। 'काली' शब्द का अर्थ काल और काले रंग से है। 'काल' का अर्थ समय। मां काली को देवी दुर्गा की 10 महाविद्याओं में से एक माना जाता है।
विशेष : कालिका के दरबार में जो एक बार चला जाता है उसका नाम-पता दर्ज हो जाता है। यहां यदि दान मिलता है तो दंड भी। आशीर्वाद मिलता है तो शाप भी। यदि आप कालिका के दरबार में जो भी वादा करने आएं, उसे पूरा जरूर करें। जो
पुत्र प्राप्ति का आशिर्वार्द लेते हुए निसंतान महिलाएं
भी मन्नत के बदले को करने का वचन दें, उसे पूरा जरूर करें अन्यथा कालिका माता रुष्ट हो सकती हैं। जो एकनिष्ठ, सत्यवादी और वचन का पक्का है समझो उसका काम भी तुरंत होगा।
मां दुर्गा ने कई जन्म लिए थे। उनमें से दो जन्मों की कथाएं ज्यादा प्रसिद्ध हैं। पहला, जब उन्होंने राजा दक्ष के यहां सती के रूप में जन्म लिया था और फिर वे यज्ञ की आग में कूदकर भस्म हो गई थीं। दूसरा, जब उन्होंने पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया, तब वे पार्वती कहलाईं।
दक्ष प्रजापति ब्रह्मा के पुत्र थे। उनकी दत्तक पुत्री थीं सती, जिन्होंने तपस्या करके शिव को अपना पति बनाया, लेकिन शिव की जीवनशैली दक्ष को बिलकुल ही नापसंद थी। शिव और सती का अत्यंत सुखी दांपत्य जीवन था, पर शिव को बेइज्जत करने का खयाल दक्ष के दिल से नहीं गया था। इसी मंशा से उन्होंने एक यज्ञ का आयोजन किया जिसमें शिव और सती को छोड़कर सभी देवी-देवताओं को निमंत्रित किया।
जब सती को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने उस यज्ञ में जाने की ठान ली। शिव से अनुमति मांगी, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जब हमें बुलाया ही नहीं है, तो हम क्यों जाएं? सती ने कहा कि मेरे पिता हैं तो मैं तो बिन बुलाए भी जा सकती हूं। लेकिन शिव ने उन्हें वहां जाने से मना किया तो माता सती को क्रोध आ गया और क्रोधित होकर वे कहने लगीं- 'मैं दक्ष यज्ञ में जाऊंगी और उसमें अपना हिस्सा लूंगी, नहीं तो उसका विध्वंस कर दूंगी।' वे पिता और पति के इस व्यवहार से इतनी आहत हुईं कि क्रोध से उनकी आंखें लाल हो गईं। वे उग्र-दृष्टि से शिव को देखने लगीं। उनके होंठ फड़फड़ाने लगे। फिर उन्होंने भयानक अट्टहास किया। शिव भयभीत हो गए। वे इधर-उधर भागने लगे। उधर क्रोध से सती का शरीर जलकर काला पड़ गया। उनके इस विकराल रूप को देखकर शिव तो भाग चले लेकिन जिस दिशा में भी वे जाते वहां एक-न-एक भयानक देवी उनका रास्ता रोक देतीं। वे दसों दिशाओं में भागे और 10 देवियों ने उनका रास्ता रोका और अंत में सभी काली में मिल गईं। हारकर शिव सती के सामने आ खड़े हुए। उन्होंने सती से पूछा- 'कौन हैं ये?' सती ने बताया- 'ये मेरे 10 रूप हैं। आपके सामने खड़ी कृष्ण रंग की काली हैं, आपके ऊपर नीले रंग की तारा हैं, पश्चिम में छिन्नमस्ता, बाएं भुवनेश्वरी, पीठ के पीछे बगलामुखी, पूर्व-दक्षिण में द्यूमावती, दक्षिण-पश्चिम में त्रिपुर सुंदरी, पश्चिम-उत्तर में मातंगी तथा उत्तर-पूर्व में षोडशी हैं और मैं खुद भैरवी रूप में अभयदान देने के लिए आपके सामने खड़ी हूं।माता का यह विकराल रूप देख शिव कुछ भी नहीं कह पाए और वे दक्ष यज्ञ में चली गईं।
भक्तों को आशिर्वाद देती है माँ की डोली
दुखों को तुरंत दूर करतीं काली : 10 महाविद्याओं में से साधक महाकाली की साधना को सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली मानते हैं, जो किसी भी कार्य का तुरंत परिणाम देती हैं। साधना को सही तरीके से करने से साधकों को अष्टसिद्धि प्राप्त होती है। काली की पूजा या साधना के लिए किसी गुरु या जानकार व्यक्ति की मदद लेना जरूरी है। महाकाली को खुश करने के लिए उनकी फोटो या प्रतिमा के साथ महाकाली के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। इस पूजा में महाकाली यंत्र का प्रयोग भी किया जाता है। इसी के साथ चढ़ावे आदि की मदद से भी मां को खुश करने की कोशिश की जाती है। अगर पूरी श्रद्धा से मां की उपासना की जाए तो आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। अगर मां प्रसन्न हो जाती हैं तो मां के आशीर्वाद से आपका जीवन बहुत ही सुखद हो जाता है।
कालरात्रि और काली : दुर्गा के 9 रूपों में 7वां रूप हैं देवी कालरात्रि का इसलिए नवरात्र के 7वें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। कालरात्रि माता गले में विद्युत की माला धारण करती हैं। इनके बाल खुले हुए हैं और गर्दभ की सवारी करती हैं, जबकि काली नरमुंड की माला पहनती हैं और हाथ में खप्पर और तलवार लेकर चलती हैं। काली माता के हाथ में कटा हुआ सिर है जिससे रक्त टपकता रहता है। भयंकर रूप होते हुए भी माता भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं। कालरात्रि माता को काली और शुभंकरी भी कहा जाता है।
कालरात्रि माता के विषय में कहा जाता है कि यह दुष्टों के बाल पकड़कर खड्ग से उसका सिर काट देती हैं। रक्तबीज से युद्घ करते समय मां काली ने भी इसी प्रकार से रक्तबीज का वध किया था।
जीवनरक्षक मां काली : माता काली की पूजा या भक्ति करने वालों को माता सभी तरह से निर्भीक और सुखी बना देती हैं। वे अपने भक्तों को सभी तरह की परेशानियों से बचाती हैं।
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लंबे समय से चली आ रही बीमारी दूर हो जाती हैं।
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ऐसी बीमारियां जिनका इलाज संभव नहीं है, वह भी काली की पूजा से समाप्त हो जाती हैं।
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काली के पूजक पर काले जादू, टोने-टोटकों का प्रभाव नहीं पड़ता।
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हर तरह की बुरी आत्माओं से माता काली रक्षा करती हैं।
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कर्ज से छुटकारा दिलाती हैं।
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बिजनेस आदि में आ रही परेशानियों को दूर करती हैं।
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जीवनसाथी या किसी खास मित्र से संबंधों में आ रहे तनाव को दूर करती हैं।
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बेरोजगारी, करियर या शिक्षा में असफलता को दूर करती हैं।
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कारोबार में लाभ और नौकरी में प्रमोशन दिलाती हैं।
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हर रोज कोई न कोई नई मुसीबत खड़ी होती हो तो काली इस तरह की घटनाएं भी रोक देती हैं।
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शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।
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पितृदोष और कालसर्प दोष जैसे दोषों को दूर करती हैं।

कालिका का यह अचूक मंत्र है। इससे माता जल्द से सुन लेती हैं, लेकिन आपको इसके लिए सावधान रहने की जरूरत है। आजमाने के लिए मंत्र का इस्तेमाल न करें। यदि आप काली के भक्त हैं तो ही करें।
मंत्र
ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली, चार वीर भैरों चौरासी, चार बत्ती पूजूं पान ए मिठाई, अब बोलो काली की दुहाई। इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करने से आर्थिक लाभ मिलता है। इससे धन संबंधित परेशानी दूर हो जाती है। माता काली की कृपा से सब काम संभव हो जाते हैं। 15 दिन में एक बार किसी भी मंगलवार या शुक्रवार के दिन काली माता को मीठा पान व मिठाई का भोग लगाते रहें।

रक्तबीज का वध : ब्रह्माजी के शरीर से ब्राह्मी, विष्णु से वैष्णवी, महेश से महेश्वरी और अम्बिका से चंडिका प्रकट हुईं। पलभर में सारा आकाश असंख्य देवियों से आच्छादित हो उठा। ब्राह्मणी ने अपने कमंडल से जल छिड़का जिससे राक्षस तेजहीन होने लगे, वैष्णवी अपने चक्र, महेश्वरी अपने त्रिशूल से, इन्द्राणी वज्र से और सभी देवियां अपने अपने आयुधों से आक्रमण कर रही थीं। राक्षस सेना भागने लगीं।
तब रक्तबीज ने राक्षसों को धिक्कारा कि वे स्त्रियों से डरकर भाग रहे हैं? रक्तबीज हमला करने आया, तो इन्द्राणी ने उस पर शक्ति चलाई जिससे उसका सर कट गया और रक्त भूमि पर गिरा। किंतु पूर्व वरदान के प्रभाव से उस रक्त से फिर एक रक्तबीज उठ खड़ा हुआ और अट्टहास करने लगा। जैसे ही शक्तियां उसे मारतीं, उसके रक्त से और असुर उठ खड़े होते। जल्द ही असंख्य रक्तबीज सब और दिखने लगे।

अपनी बारी की इन्तजार करते हुए श्रद्धालू
मां चंडिका ने श्रीकाली से कहा कि इसका रक्त भूमि पर गिरने से रोकना होगा जिससे और रक्तबीज न जन्में। देवी काली ने कहा कि आप सब इन्हें मारें, मैं एक बूंद रक्त भी भूमि पर न पड़ने दूंगी। और ऐसा ही हुआ भी, जल्द ही सारे नए रक्तबीज युद्ध में मारे गए। तब रक्तबीज समझ गया कि काली उसे पुनर्जीवित नहीं होने दे रही हैं, तो वह चंडिका को मारने दौड़ा। तब चंडिका ने उसे मार दिया और काली ने रक्त को भूमि पर न गिरने दिया। देवता चंडिका की जय-जयकार करने लगे।
महाकाली की उत्पत्ति कथा : श्रीमार्कण्डेय पुराण एवं श्रीदुर्गा सप्तशती के अनुसार काली मां की उत्पत्ति जगत जननी मां अम्बा के ललाट से हुई थी। कथा के अनुसार शुम्भ-निशुम्भ दैत्यों के आतंक का प्रकोप इस कदर बढ़ चुका था कि उन्होंने अपने बल, छल एवं महाबली असुरों द्वारा देवराज इन्द्र सहित अन्य समस्त देवतागणों को निष्कासित कर स्वयं उनके स्थान पर आकर उन्हें प्राणरक्षा हेतु भटकने के लिए छोड़ दिया। दैत्यों द्वारा आतंकित देवों को ध्यान आया कि महिषासुर के इन्द्रपुरी पर अधिकार कर लिया है, तब दुर्गा ने ही उनकी मदद की थी। तब वे सभी दुर्गा का आह्वान करने लगे। उनके इस प्रकार आह्वान से देवी प्रकट हुईं एवं शुम्भ-निशुम्भ के अति शक्तिशाली असुर चंड तथा मुंड दोनों का एक घमासान युद्ध में नाश कर दिया। चंड-मुंड के इस प्रकार मारे जाने एवं अपनी बहुत सारी सेना का संहार हो जाने पर दैत्यराज शुम्भ ने अत्यधिक क्रोधित होकर अपनी संपूर्ण सेना को युद्ध में जाने की आज्ञा दी तथा कहा कि आज छियासी उदायुद्ध नामक दैत्य सेनापति एवं कम्बु दैत्य के चौरासी सेनानायक अपनी वाहिनी से घिरे युद्ध के लिए प्रस्थान करें। कोटिवीर्य कुल के पचास, धौम्र कुल के सौ असुर सेनापति मेरे आदेश पर सेना एवं कालक, दौर्हृद, मौर्य व कालकेय असुरों सहित युद्ध के लिए कूच करें। अत्यंत क्रूर दुष्टाचारी असुर राज शुंभ अपने साथ सहस्र असुरों वाली महासेना लेकर चल पड़ा। उसकी भयानक दैत्यसेना को युद्धस्थल में आता देखकर देवी ने अपने धनुष से ऐसी टंकार दी कि उसकी आवाज से आकाश व समस्त पृथ्वी गूंज उठी। पहाड़ों में दरारें पड़ गईं। देवी के सिंह ने भी दहाड़ना प्रारंभ किया, फिर जगदम्बिका ने घंटे के स्वर से उस आवाज को दुगना बढ़ा दिया। धनुष, सिंह एवं घंटे की ध्वनि से समस्त दिशाएं गूंज उठीं। भयंकर नाद को सुनकर असुर सेना ने देवी के सिंह को और मां काली को चारों ओर से घेर लिया। तदनंतर असुरों के संहार एवं देवगणों के कष्ट निवारण हेतु परमपिता ब्रह्माजी, विष्णु, महेश, कार्तिकेय, इन्द्रादि देवों की शक्तियों ने रूप धारण कर लिए एवं समस्त देवों के शरीर से अनंत शक्तियां निकलकर अपने पराक्रम एवं बल के साथ मां दुर्गा के पास पहुंचीं। तत्पश्चात समस्त शक्तियों से घिरे शिवजी ने देवी जगदम्बा से कहा- मेरी प्रसन्नता हेतु तुम इस समस्त दानव दलों का सर्वनाश करो।तब देवी जगदम्बा के शरीर से भयानक उग्र रूप धारण किए चंडिका देवी शक्ति रूप में प्रकट हुईं। उनके स्वर में सैकड़ों गीदड़ों की भांति आवाज आती थी। असुरराज शुम्भ-निशुम्भ क्रोध से भर उठे। वे देवी कात्यायनी की ओर युद्ध हेतु बढ़े। अत्यंत क्रोध में चूर उन्होंने देवी पर बाण, शक्ति, शूल, फरसा, ऋषि आदि अस्त्रों-शस्त्रों द्वारा प्रहार प्रारंभ किया। देवी ने अपने धनुष से टंकार की एवं अपने बाणों द्वारा उनके समस्त अस्त्रों-शस्त्रों को काट डाला, जो उनकी ओर बढ़ रहे थे। मां काली फिर उनके आगे-आगे शत्रुओं को अपने शूलादि के प्रहार द्वारा विदीर्ण करती हुई व खट्वांग से कुचलती हुईं समस्त युद्धभूमि में विचरने लगीं। सभी राक्षसों चंड मुंडादि को मारने के बाद उसने रक्तबीज को भी मार दिया। शक्ति का यह अवतार एक रक्तबीज नामक राक्षस को मारने के लिए हुआ था। फिर शुम्भ-निशुंभ का वध करने के बाद बाद भी जब काली मां का गुस्सा शांत नहीं हुआ, तब उनके गुस्से को शांत करने के लिए भगवान शिव उनके रास्ते में लेट गए और काली मां का पैर उनके सीने पर पड़ गया। शिव पर पैर रखते ही माता का क्रोध शांत होने लगा.
!! जय माँ कालिका !!
आलेख व फोटोग्राफ- सुशील डोभाल, नई टिहरी नगर उत्तराखंड.
सुशील डोभाल, नई टिहरी नगर .
     


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